क्या है मेरा दोष ?
क्या है मेरा दोष ?
रचयिता : मनोरमा जोशी
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व्यथा से परिपूर्ण,
श्वेत वस्त्रों में बंधी,
एक असहनीय दुःख को
उर मे समेटे,
जी रही संसार में
बस एक याद के सहारे,
बच्चों के खातिर,
एक रोटी के लिए,
रहती हूँ सहमी,
सास के द्धारे,
है बढ़ा कठिन पल,
क्या था कल,
और आज क्या हो गया
सब कुछ तो जल गया,
कुछ बाकी न रहा।
रह गयी तो बस एक वीरान सी जिंन्दगी।
करता हैं समाज मुझसे घृणा,
इसमें क्या हैं मेरा दोष ?
इस समाज में मेरा कोई
अस्तित्व नहीं ,कोई पहचान नहीं।
क्या है मेरा दोष ?
लेखिका का परिचय :- श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा-स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्य...

















