Notice: Function wp_get_inline_script_tag was called incorrectly. Unable to set inline script data. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 7.0.0.) in /home4/hindim8d/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170
Tuesday, July 21राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

वाह क्या नजारा था

वाह क्या नजारा था

रचयिता : वंदना शर्मा

एक दिन

घर से निकलते ही
दिखा
वाह क्या नजारा था?
एक आदमी
एक हाथ में खंजर लिए
दूसरे को काट रहा था |
 पहले तो
देखकर कुछ समझ नहीं आया |
फिर सोचा
कि
शायद कोई पागल है
या कोई जादूगर,
क्योंकि एेसा अचम्भा जीवन में पहली बार देखा था |
देखकर रहा नहीं गया,
जाने लगी उसे रोकने
तो
सहेली ने मुझे रोक दिया
कि रहने दो
क्यों व्यर्थ के पचड़े में  पड़ती हो |
पर समस्या गम्भीर है
स्त्री स्वभाव
और कवि हृदय
पूछना आवश्यक हो गया था |
नहीं पूछें तो पेट दर्द |
मुझसे
रहा नहीं गया |
पास जाकर बोली ,
कि चाचाजी
क्या कर रहे हो?
अपने ही हाथों स्वंय
अपने ही हाथ क्यों
काट रहें है ?
आप शक्ल से
पागल भी तो नहीं लगते
तो ये पागलपन क्यों?
त्यौरियाँ  चढ़ाते हुए
उन्होने
मुझे घूरा|
 क्षण भर
ठहर कर फिर कहा,
कि
बिटिया  बात तो
समझ की करती हो|
पर  ये नहीं  देखती
कि  दुनिया का हर आदमी
अपने ही हाथों
अपनी  दूसरी  भुजा
को काट रहा है |
मैं  तो केवल एक प्रतिमान हूँ|
सुनना चाहती हो तो सुनो|
तुम्हें  ये लगता है,
कि मैं  अपना हाथ
काट रहा हूँ |
पर
मेरे  दर्द  का अन्दाजा तो लगाओ|
मेरी आँखों से आँख मिलाकर तो देखो|
अरी पहली! मैं हिंदुस्तान हूँ |
मुझे आदत है, जख्म सहने की,
क्योंकि
मै कटता रहा हूँ, कितनी बार
बँटता रहा हूँ हर बार
लहुलुहान होता हूँ|
और तुम्हें लगता है, कि
मैं अपने हाथ काट रहा हूँ |
अरे नहीं!
ये दोनों भुजाएँ
मेरी दो औलाद है,
एक हिंदू तो एक मुसलमान है |
छोटी -छोटी  बातों में
तनकर खड़ी है, एक दूसरे के सामने,
एक खंजर तो एक बम लेकर खड़ी है |
सोचो
क्या तुम मुझसे अलग होकर जी पाओगे|
अरे! अपनी ही नजरों में गिर जाओगे |
अरे!  याद करो
उस दिन को
जब रावण मरण शैय्या  पर पड़ा था,
तो लक्ष्मण से उसने भी तो
यही कहा था,
कि मैं हारा हारा हारा
क्योंकि मुझे भाई ने छला|
वो जीत गया,
क्योंकि उसके भाइयों ने उसका साथ दिया|
अरे!  मत लड़ो अपने ही भाई  से |
मैं  मानता हूँ |
तुम जवान हो,
खून में उबाल है,
तो
तुम्हारे बाप की हिदायत है |
शौक है, लड़ने का, तो लड़ो
दुश्मन से |
मरना है, तो मरो सरहद पर |
अरे!
उस दिन
तुम्हारी  मौत का उत्सव भी महोत्सव
हो जाएगा,
और
तुम्हें लेने काल तो क्या
स्वयं महाकाल चला आएगा|
लेखीका परिचय :- 
नाम – वंदना शर्मा आत्मजा श्री देवकी नंदन शर्मा
जन्म – ३ नवंबर, १९९१
निवासी – अकलेरा, जिला- झालावाड़ (राजस्थान)
शिक्षा – स्नातकोत्तर
लेखन कार्य – जब पहली बार देवास से आए शशीकांत यादव सर को सुना, बस तभी से ईशवर की ये अनुपम दौलत मुझे मिली |
रूची- डेकोरेशन क्राफ्ट बनाना ,लेखन
लेखन – व्यंग्य, कविता, एकांकी

आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर कॉल करके सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि पढ़ें अपने मोबाइल पर या गूगल पर www.hindirakshak.com सर्च करें…🙏🏻

आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा (SHARE) जरुर कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com  कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने मोबाइल पर प्राप्त करने हेतु हिंदी रक्षक के ब्राडकॉस्टिंग सेवा से जुड़ने के लिए अपने मोबाइल पर पहले हमारा नम्बर ९८२७३ ६०३६० सेव के लें फिर उस पर अपना नाम और प्लीज़ ऐड मी लिखकर हमें सेंड करें…

विशेष सूचना-लेख सहित विविध विषयों पर प्रदर्शित रचनाओं में व्यक्त किए गए विचार अथवा भावनाएँ लेखक की मूल भावना है..http://hindirakshak.com पोर्टल 
या हिंदी रक्षक मंच ऐसी किसी भी कृति पर होने वाले किसी विवाद और नकल (प्रतिलिपि अधिकार) के लिए भी बिल्कुल जिम्मेदार नहीं होगा,इसका दायित्व उक्त रचना
सम्बंधित लेखक का रहेगा। पुनः स्पष्ट किया जा रहा है कि, व्यक्त राय-विचार सम्बंधित रचनाकार के हैं, उनसे सम्पादक मंडल का सहमत होना आवश्यक नहीं है। 
धन्यवाद। संस्थापक-सम्पादक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *