मौन हूँ … अनभिज्ञ नहीं
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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शांत हूँ, मौन हूँ किन्तु
अनभिज्ञ नहीं हूँ
दर्द को मुस्कराहट में
छुपाना जानती हूँ
एक कहानी हूँ,
पर अधूरी नहीं!!
प्रेम धर्म निभाती हूँ
करुणा से भरा
हृदय रखती हूं
संवेदनाओं से भरी हूँ
आरंभ हूँ अंत नहीं!
कभी उकेरी हुई
भावनाओं से ओतप्रोत,
कभी भ्रमित होती कल्पनाओं
एवं वास्तविकता में,
कभी तराशी गई
कभी नकारी गई हूँ
दिलों की अभिव्यक्ति
बनी हूँ खामोशी नहीं!!
खुशियों की बरसात में
छुपकर रहने वालों को,
हँसी की दो बूंद के
लिए तरसते देखा है,
अभिमान मे डूबे रहने वालों को
तन्हाई में छुपकर रोते देखा है,
सपनों को पूरा करने
का हौसला रखती हूँ
नारी हूँ, किन्तु
बेबस-लाचार नहीं!!
जीवन के सही अर्थ को
समझना चाहती हूँ,
स्नेह और करुणा का दीपक
चारों ओर जलाना चाहती हूँ,
स्व चेतना के प्रकाश से
आंतरि...















