आलिंगन
प्रतिभा दुबे
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
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होता जब आलिंगन तब,
प्रेम से जीवन लेता जन्म !
नव शिशु की धड़कन सुन
हुआ मधुर सा आलिंगन।।
प्रेम से भरा स्पर्श हमें प्राप्त,
आलिंगन से ही हुआ सदैव।
जैसे धरती और गगन के,
आलिंगन से बहती हैं पवन।।
स्नेह से भरे आलिंगन ही,
हमें सहानभूति प्रदान करता।
हम बचपन की दहलीज में,
आलिंगन की भाषा प्रेम समझते।।
भटकते नहीं है फिर यह कदम
जब मिल जाता प्रेम का आलिंगन।
जब बढ़े ज्ञान की ओर कदम
होता परम आत्मा से आलिंगन।।
प्रेम, दया, क्षमा से भरा हृदय
सत्य का करता सुंदर आलिंगन।।
परिचय :- श्रीमती प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
निवासी : ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
उद्घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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