जिंदगी का भरोसा नहीं
सीमा रंगा "इन्द्रा"
जींद (हरियाणा)
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पल-पल निहारती जिंदगी
कब कहां किसे देख रहा तू ?
कब होगा आखिरी क्षण
ज्ञात नहीं है तुझे भी
तो फिर क्यों लगी भागदौड़?
जो है कर गुजारा उसमें
देखा-देखी दौड़ में लगा
पल भर का भरोसा नहीं
आज तेरा कल होगा किसी का
फिर क्यों जकड़ रखा खुद को?
फिसलेगा तेरे हाथ से सब
रोक ना पायेगा तू कहर को
सुख-दुख का फेर निराला
तू गठरी क्यों बांधे दुख की?
दुःख की माला फेरता रहता
सुख को क्यों नहीं जपता
परिचय :- सीमा रंगा "इन्द्रा"
निवासी : जींद (हरियाणा)
विशेष : लेखिका कवयित्री व समाजसेविका, कोरोना काल में कविताओं के माध्यम से लोगों टीकाकरण के लिए, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ हेतु प्रचार, रक्तदान शिविर में भाग लिया।
उपलब्धियां : गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से प्रशंसा पत्र, दैनिक भास्कर से रक्तदान प्रशंसा पत्र, सावित्रीबाई फुले अवार्...




















