कुम्हार के दीये
देवप्रसाद पात्रे
मुंगेली (छत्तीसगढ़)
********************
पीढ़ियों से पुरुखों की
विरासत बढाने।
मिट्टी से बने दीये
कंधों में सम्भाले।।
सुख शांति की कामना लिए
दीवाली में उमंग के पल।
द्वार तेरे दीपों से सजाने,
निकल पड़े हैं आजकल।।
जगमगाती दीपों के पर्व में,
उनके होंठों पे मुस्कान दे दो
कुम्हार के दीये ले लो..
तामझाम रौनक बाजारों में,
तुम्हें मिट्टी के दीये रास आ जाये।
तुम्हारे महल की रोशनी से,
उनके अंधेरे घरों में प्रकाश आ जाये।।
खुशियों की आश लिए बाहों में,
बैठ जाते हैं चौक-चौराहों में।
आशाओं के दीप जलाकर,
बैठे हैं तेरे इंतजार में।
खुशियों की सौगात दे दो।
कुम्हार के दीये ले लो..
परिचय : देवप्रसाद पात्रे
निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताए...





















