दिव्य जोत
रेखा कापसे "होशंगाबादी"
होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)
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शुद्ध गीता छंद
मापनी- २१२२ २१२२, २१२२ २१२१
चैत मासे शुक्ल प्रतिपद,
साथ जलती दिव्य जोत।
प्रथम चंद्र दिवस कहे है,
साल का नववर्ष होत ।।
उस विधाता ने रची थी,
काल चक्री सृष्टि आज ।
विष्णु अवतारी हुए थे,
मिलन प्रकृति दृष्टि साज ।।
आज है नव वर्ष देखो,
दे सदा ही आन बान।
कामना मेरी यही हैं,
आप पाओ आसमान।।
दुःख का साया नहीं हो,
सुख बसा हो आस पास।
नित्य जीवन आपका हो,
प्रेम खुशियाँ भार खास।।
पेड़ पाते फूल कलियाँ,
मंजरी इस काल चक्र।
लौट कर आती बहारे,
साल में हर बार वक्र।।
दौर ये मधुमास प्यारा,
घोलता है प्रेम प्रीत।
शुद्ध होती है धरा भी,
पूजती गणगौर रीत।।
कूक कोयल आम खुशबू,
कर रहे सब चित्त चोर।
नव फसल का गान करती,
मोर बोले बाग जोर।।
मस्त मद आनंद आभा,
नभ खिली हैं आज भोर।
गीत गाते हैं सुहाने,
नाचते सब जोर शोर।।
परिचय :- रेखा का...
















