फागुन आया
संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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फागुन मास आया।
संग फाग लाया।
चहुंओर हर्ष छाया।
होलिका दहन कराया।
हम सब वसंतोत्सव मनाए।
सकल भारतवासी
होली उत्सव मनावै।
हम सब लाल, गुलाबी,
हरा, नारंगी रंग अरु।
गुलाल एक-दूजे के
गाल पर मल-मल।
सब रंग भर-भर
पिचकारी चलावे।
होली आपस में
प्रेम बढ़ावें।
ब्रज, मथुरा, होली
राधा-कृष्ण।
होली याद दिलावे।
ब्रज, गोकुल,
वृंदावन, मथुरा।
फूलों की होली खूब।
धमाल मचावे।
लठमार होली
खूब धूम मचावै।
होली पर शक्ति
उर उमंग छावे।
परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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