तकल्लुफ का कोई एहसास तो दिखलाइए
आलोक रंजन त्रिपाठी "इंदौरवी"
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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अब तकल्लुफ का कोई एहसास तो दिखलाइए
जो सुकूं दे दिल को वो अल्फ़ाज़ तो दिखलाइए
बेटियों के पैर में बेड़ी है इन को खोल दो
इन परिंदों को ज़रा आकाश तो दिखलाइए
कट गई शब ख्वाब में ऊंची उड़ानें साथ थी
अब सहर की खुशनुमा परवाज़ तो दिखलाइए
मैंने तो दिल को मेरे अब कैद करके रख लिया
आप अपना थोड़ा सा अंदाज़ तो दिखलाइए
हम चलेंगे साथ जब तक है इशारा आपका
क्या क़दम है आपका आगाज़ तो दिखलाइए
तितलियों को इस तरह पकड़ो ना नाज़ुक हैं बड़ी
साथ में इनके यही इकरार तो दिखलाइए
देश की खातिर जो सीना तान करके हैं खड़े
आपको है इन पे कितना नाज़ तो दिखलाइए
परिचय :- आलोक रंजन त्रिपाठी "इंदौरवी"
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए (हिंदी साहित्य)
लेखन : गीत, गजल, मुक्तक, कहानी, तुम मेरे गीतों में आते प्रका...
























