सरस्वती वंदना
कुंदन पांडेय
रीवा (मध्य प्रदेश)
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वंदन करूं.....
मात सरास्वती तेरी
महिमा का गुणगान करूं।
वंदन करूं......
गुण पूरित वेद पुराण पति,
तेरी महिमा का मैं बखान करूं।
वंदन करूं.....
हे बागेश्वरी माता कमलासिनी
रज तेरी सर माथ धरूं।
शोभा निज वृहद विसद हो माता,
जब भी तेरा ध्यान करूं।
करुणा की देवी ज्ञान मई,
तेरा हरक्षण सम्मान करूं।
वंदन करूं.......
तेरी ही कृति हूं हे मां भारती
तुझसे ही नित पूरित हूं।
तेरी ही वाणी है ये माता,
मैं बस तुझको ध्याती हूं।
मन व्याकुल जब भी हो माता,
ब्यूहल सी तेरी राह तकूं।
वंदन करूं.....
मात सरास्वती तेरी
महिमा का गुणगान करूं।
वंदन करूं.....
परिचय :- कुंदन पांडेय
निवासी : रीवा (मध्य प्रदेश)
उद्घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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