आन बान यह हिन्दी है
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
********************
विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना
प्यारे भारत के जन-मन का, स्वाभिमान यह हिन्दी है।
अमर तिरंगे की गरिमा की, आन-बान यह हिन्दी है।।
जन-मन के भावों, विचार के विनिमय का जो साधन है।
विश्व पटल पर शिष्ट सलीकेदार ध्वनित अभिवादन है ।
भारत माँ के माथे पर की, अरुणोदय-सी बिन्दी है।
अमर तिरंगे की गरिमा की, आन-बान यह हिन्दी है।।
अँग्रेजों ने भी जिसके प्रसरण का भर-सक यत्न किया।
संविधान ने संघ राजभाषा धिकार का रत्न दिया।।
दयानन्द, गाँधी, सुभाष ने, अपनाई यह हिन्दी है।
अमर तिरंगे की गरिमा की, आन-बान यह हिन्दी है।।
भारतेन्दु दिनकर माखन के, राष्ट्र-प्रेम की परिभाषा।
सूरदास मीरां तुलसी की, भक्ति भाव की अभिलाषा।।
भावात्मक बन्धुत्व प्रेम का, मधुर गान यह हिन्दी है।
अमर तिरंगे...

























