जीवन का यह गीत निराला
दिति सिंह कुशवाहा
मैहर जिला सतना (मध्य प्रदेश)
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क्या खोया क्या पाया !
जीवन यह अमूल्य पाया
कभी छाँव है कभी धूप
जीवन पथ पर परिवर्तन आया।
कभी पवन चलती है सर-सर
कभी मंद हिलकोरों के संग-संग
घन की उन घनघोर घटाओं के तट
चम -चम बिजली चमक रही नभ पर
पवन तरंगनी उन्मादों के स्वर से
जीवन का यह गीत निराला।।
पवन वेग आवेगों से
अवनि पर लाती है घन से
किसानों की अब सफल साधना
लहराती अमृत की बरखा
वसुधा नवल -धवल यह मिट्टी
कूप सरोवर बावली जल परिपूरित
हरित खेत खलिहानों का
जीवन का यह गीत निराला।।
परिचय : दिति सिंह कुशवाहा
जन्मतिथि : ०१/०७/१९८७
शिक्षा : एम.ए. हिंदी साहित्य
पिता : रामविशाल कुशवाहा
पति : सत्य प्रकाश कुशवाहा
निवासी : मैहर जिला सतना (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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