पुरखा के सुरता
परमानंद सिवना "परमा"
बलौद (छत्तीसगढ)
********************
छत्तीसगढ़ी
नवा-नवा जिंदगानी हे,
पुरखा के अब बस पहचानी हे,
नवा-नवा आभुषण होंगे,
अइठी, बिछवा चिन्हारी होंगे.!
चिमनी, कन्डील कहानी होंगे,
कुमडा बघवा कहानी पुरानी होगे,
दाई के गोधना,
अउ अइठी देखें जिन्दगी होंगे.!
बबा के पागा,
अउ धोती पहने हाथ लाठी,
संस्कृति परम्परा मा बबा दाई
रहाय अब लइका मन मेछरावत हे.!
पहली के मन अनपढ़ रहाय
फिर भी परिवार एकता मा रहाय,
अबके मन पढ़े-लिखे परिवार दुरियां रहाय.!
हम दो हमारे दो कहीके जीवन चलाय,
जे जनम दिस तेला छोड़ के ते खुशी मनाये.!!
परिचय :- परमानंद सिवना "परमा"
निवासी : मडियाकट्टा डौन्डी लोहारा जिला- बालोद (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, ...
























