वर्षा का उत्सव
विवेक नीमा
देवास (मध्य प्रदेश)
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ऋतु सुहानी सावन की
चली पवन मनभावन सी
श्यामल मेघा देखो छाए
अमृत रूपी वृष्टि लाए।।
चपला की है चमक निराली
हलधर की आई है दिवाली
ताल, तलैया नदी और सागर
भर जाएगी अब सबकी गागर।।
नाच रहे हैं मोर मुदित हो
दादुर भी टर्राये क्षुधित हो
कूके पपीहा, कोयल काली
झूले पड़ गए अंबुआ की डाली।।
रूप धरा का निखर उठा है
हरित वर्ण-सा बिखर उठा है
वर्षा का उत्सव आया है
धन-धान्य खुशियाँ लाया है।।
परिचय : विवेक नीमा
निवासी : देवास (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी कॉम, बी.ए, एम ए (जनसंचार), एम.ए. (हिंदी साहित्य), पी.जी.डी.एफ.एम
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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