होली – हैवानियत
परमानंद सिवना "परमा"
बलौद (छत्तीसगढ)
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रंगों कि पीछे छिपे होते है हैवानियत,
नशा पान करके भांग पीकर मांस
खाकर उर्ग होते है परेशानीयां.!
रंगों कि होड मे गलत
करते कलयुग के रावण,
समझो जानो अपनो कि
इज्ज़त सम्मान को पहचनो !
सभी के साथ
खुशियों से रंग लगावो,
बुरे इंसान उनके हरकतो को
पहचानो उनसे दुर है जाओ.!
बुरा न मानो होली है लेकिन
किसी के साथ बुरा करना होली नहीं,
गांव को गोकुल, मथुरा, काशी, बनाओ,
रंगो कि बौछार से अपनो से खुशियां बनाओ.!!
परिचय :- परमानंद सिवना "परमा"
निवासी - मडियाकट्टा डौन्डी लोहारा जिला- बालोद (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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