माया छोड़ो मानवता जोड़ो
ओमप्रकाश श्रीवास्तव 'ओम'
तिलसहरी (कानपुर नगर)
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देखे माया जब जग,
भटके उसका पग।
द्वेष दर्प अति झूमे
होता मानवता पतन।
होते ज्ञानी कुछ लोग,
त्यागें यह माया भोग।
चले मानवता पंथ
इंसान को करे नमन।
कुछ नर लोभी होते,
सत्य धर्म सब खोते।
पाने को अकूत धन
करते कितने जतन।
कहे ओम मानो बात,
छोड़ो भेद धर्म जात।
लोभ दर्प द्वेष त्यागो
प्रेम से रहिए वतन।।
परिचय :- ओमप्रकाश श्रीवास्तव 'ओम'
जन्मतिथि : ०६/०२/१९८१
शिक्षा : परास्नातक
पिता : श्री अश्वनी कुमार श्रीवास्तव
माता : श्रीमती वेदवती श्रीवास्तव
निवासी : तिलसहरी कानपुर नगर
संप्रति : शिक्षक
विशेष : अध्यक्ष राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच उत्तरीभारत इकाई, रा.उपाध्यक्ष, क्रांतिवीर मंच, रा. उपाध्यक्ष प्रभु पग धूल पटल, रा.मीडिया प्रभारी-शारदे काव्य संगम, प्रभारी हिंददेश उत्तरप्रदेश इकाई
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