पेड़ की व्यथा
डॉ. तेजसिंह किराड़ 'तेज'
नागपुर (महाराष्ट्र)
********************
समय का रूख देखकर
जिंदगी के रंगों का रंग और
बदल जाते हैं हालात सभी।
इन पत्तों की क्या विसात
बड़ी टहनियां भी टूटकर
और जड़े भी उखड़ जाती हैं कभी।
एक हवा का झोका ही काफी हैं
पत्ते उड़ाकर ले जाने को।
तूफान में भी वजूद जिनका बना रहे
ऐसे पत्ते संभालों आईना दिखाने को ।
पत्तों, फूलों और टहनियों का प्रश्न हैं
सहज सी जिंदगी व दुखभरा हश्र हैं
हरे रंगों की चादर में रंगबिरंगे सितारे हैं
आंखों को सुकून दे ऐसे पत्ते हमारे हैं
मन को महका दे फूलों की खुशबू हैं
तपन को भूला दे शीतल परछाई हैं
क्यों काटते पेड़ ये कैसी बेहरूमाई हैं?
ऐसे लाखों प्रश्न हैं पर जिंदगी कम हैं
हवा के सहारे ही जीवन का मर्म हैं
दर्द किसे बयां करें किस्मत का रोना हैं
तूफानों को सहने का हौंसला अपना हैं
पत्तियां बिखर गई पर कोई गम नहीं हैं
फूल म...






















