पिता
ज्योति लूथरा
लोधी रोड (नई दिल्ली)
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जो अपने पूरे
परिवार के लिए है
हर समय जीता,
जो अपने सपनों को
छोड़ बच्चो के
ख्वाब है सिता,
जो कभी न बताए
की उस पर
क्या-क्या है बिता,
वो दुनिया का
अनमोल
रत्न है पिता।
मेरा स्वाभिमान,
मेरा सम्मान,
मेरा अभिमान,
है मेरे पिता।
अपने बारे में
कभी न सोचते,
बस हमारे ही
सपने संजोते,
मेरा मान मेरी उड़ान,
है मेरे पिता।
गलती होने पर
तुरंत कर देते माफ,
उनका दिल है
कितना साफ़,
बाहर से सख्त
अंदर से नरम,
उनकी डाट भी है
कितनी अनुपम।
मेरी जान है मेरे पिता,
दुनिया का अनमोल
रत्न है पिता,
जो हमेशा सब को देता,
पर खुद के लिए
कभी कुछ न लेता।
वो महान इंसान है पिता,
वो भगवान है पिता।
परिचय :- ज्योति लूथरा
संस्थान : दिल्ली विश्वविद्यालय
निवासी : लोधी रोड, (नई दिल्ली)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ...























