जब खत को लीखा
मनमोहन पालीवाल
कांकरोली, (राजस्थान)
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पहली बार जब खत को लीखा
खत में तेरी मुहब्बत को लीखा
खत में यारो मैने भी अपनी
कहीं उन सब हकीकत को लीखा
कट जाता है वक्त मेरा बातों मे
मेरे उस उल्फ़त को लीखा
याद है वो सब बातें तुम्हारी
उन बातों की शरारत को लीखा
पहले नज़र मीली तुमसे यहाॅ
उसमे अपनो चाहत को लीखा
इश्क़ खुदा की सौगात हैं यारों
उस में मेरी इबादत को लीखा
जब वक्त आया इज़हार का,
राहों की कयामत को लीखा
वो ख़त जब सरे आम हुआ था
मैने दिल की आहत को लीखा
खुदा के दर कबूल हुई दुआ मोहन
आहसास- ए- इशरत को लीखा
मेरी मंजिल मुकम्मल हुई "मोहन"
ख़त मे अपनी किस्मत को लीखा
परिचय :- मनमोहन पालीवाल
पिता : नारायण लालजी
जन्म : २७ मई १९६५
निवासी : कांकरोली, तह.- राजसमंद राजस्थान
सम्प्रति : प्राध्यापक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता ...
























