कहां चल दिए
अनूप कुमार श्रीवास्तव "सहर"
इंदौर मध्य प्रदेश
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अभी घर में रह लेनें की हिदायत है,
कहां जाएंगे वो अभी जो रास्तें में है।
किसी तरह से न सोनें देंगी,
आज की यें तस्वीर भी कहीं ।
गुजार सका ना कुनबा मजूर का
एक रात शहर के किसी कोनें में।
दावे बड़े दिल के सब धरें रह गएं
जो दिल्ली बनातें कहां चल दिएं।
है जेब खाली खाली है पेट खाली,
ये ठहरा हुआ वक्त कितना मवाली।
प्यास कैसी कैसी प्रार्थनाएं भी कैसी
चलें संग परिवार, सड़क है बिछौनें।
गुजार सका ना कुनबा मजूर का
एक रात शहर के किसी कोनें में।
परिचय :- अनूप कुमार श्रीवास्तव "सहर"
निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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