मां और सर्दी का मौसम
श्रीमती विभा पांडेय
पुणे, (महाराष्ट्र)
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मां और सर्दी का मौसम
सर्दी का मौसम
मां तुम्हारी बड़ी याद दिलाता है।
बचपन की वादियों में ले जाकर,
अक्सर घुमा लाता है।
छुटपन में जब गठरी बन कर
रजाई में तुम्हारे छिपकर
हम सो जाते थे,
तुम धीरे- से थोड़ा खिसककर,
रजाई से हमें अच्छे से ढंककर,
अपने थोड़ा बाहर होकर सोती
और प्यार से हमें ढंकती थी,
वो स्पर्श याद दिला जाता है।
चाहे कितनी भी ठंड हो,
अंगीठी की सुर्ख आंच पर,
हमारे लिए रोज चाव से
कुछ न कुछ बनाना
और हमें खाते देख निहाल हो जाना,
सच कहूं मां तुम्हारे प्यार से पगा
वो स्वाद
बार-बार याद दिला जाता है।
गरम कपड़ों से पूरा लदे होने पर भी
तुम्हारी आंखों की वो चिंता
कहीं ठंडी न लग जाए।
स्कूल निकलने के समय
काफ़ी दूर तक हमें जाते देखते
खड़े रहना और
तुम्हारी आंखों का भर जाना,
आज भी याद दिलाता है।
ये कमबख्त सर्दी का मौसम
तुम्हारे न होने की स...






















