बचपन की नाव
सौ. निशा बुधे झा "निशामन"
जयपुर (राजस्थान)
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मेरी कश्ती आज फिर से तैयार है।
बारिश में सामान को तैयार हैं।।
सारे शहर में बारिश के शौकीन हैं।
बस बंद हैं, तो वह स्कूल।।
जहाँ बच्चों के शौक हैं।
वह रास्ता, वह गलियाँ।।
वह तेरा चौबारा।
वह गांव की पक डंडी।।
जिस ओर मुझे मेरी कश्ती मिलती है।
बाकी मेरी छोटी सी कश्ती हैं।।
बह कर किनारे पर। तो
कभी भँवर में डूब न जाय।।
मुझे डर था, पर वो तो निडर हैं।
बहफैक्ट वो, अपना रास्ता कर।।
आज वो कश्ती फिर से गाड़ी का मन है।
क्योंकि वक्ता जो रुक गया..
एक बार फिर से मुकर देखने का मन है।
बचपन को लेकर चलना का मन है।।
परिचय :- सौ. निशा बुधे झा "निशामन"
पति : श्री अमन झा
पिता : श्री मधुकर दी बुधे
जन्म स्थान : इंदौर
जन्म तिथि : १३ मार्च १९७७
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
शिक्षा : बी. ए. इंदौर/...




















