गम के आँसू पिये जा
दामोदर विरमाल
महू - इंदौर (मध्यप्रदेश)
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ज़िन्दगी बेकार है, गम के आँसू पिये जा !
ज़िन्दगी बेकार है, गम के आँसू पिये जा !!
इतनी ज़ेहमत उठानी होगी ज़िन्दगी मे आकर,
क्या मिला इन्सान को इतना पैसा कमाकर !
क्या हुआ खुदको शरीफ़ दिखाकर,
क्या कर लिया दूसरो पर उंगलियां उठाकर !!
अबतो मरने मारने को भी तैयार है
बस तु पिये जा……………………!!
कंजूसी मे एक ईट पर पर भी घर टिक जाता है,
चंद पैसो के लिये आजकल इंसान बिक जाता है !
कोई खरीदना बेचना इन इन्सानो से सीखे,
“राज” तो इन जैसो पर ग़ज़ल लिख जाता है !!
मुफ़्त का खा पीकर सब लेते डकार है
बस तु तो पिये जा……………………!!
रूठी है ज़िन्दगी अब ज़ोर दो मनाने मे,
पेहले लोग वक्त बिताते थे सबको हंसाने मे !
अबतो चाहे सारा जहाँ लुट जाये, कोई नही सुनने वाला…
ग़रीब वहीं पीछे और अमीरो की वही रफ़्तार है-
बस तु तो पिये जा………………….!!
इंसानियत कहाँ चली गई कोई समझ ...
















