राष्ट्रनिर्माता
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रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद"
शिक्षक होता है राष्ट्रनिर्माता,
वह कभी नही चेन से खाता
कभी निर्वाचन नामावली बनाता,
कभी बीएलओ बन घर-घर जाता।
कभी छात्रवृद्धि करवाता फिर भी,
उसे (लोग) फोकट खोर कहा जाता।
कुछ लोग कहते यह कभी स्कूल जाता,
कभी स्कूल नही है जाता,
फोकट का वेतन पाकर मस्ती से खाता,
वह जनता को इस पर कुछ नही बता पाता।
शिक्षक कभी पशु, कभी दिव्यांग गणना करता,
कभी मकान कभी अज्ञान की गणना करवाता,
हर हाल में अनेक-अनेक चुनाव करवाता,
गरीब,अति गरीब का लेखा-जोखा बनवाता।
वह रोज बर्तन साफ व मध्यान्ह भोजन करवाता,
प्रतिदिन स्कूल की दो बार घण्टी बजाकर,
स्कूल खुलने और बन्द होने का एहसास कराता,
भला आप बताएं क्या शिक्षक फोकट की खाता?
वैसे सब शिक्षक को कहते राष्ट्र निर्माता,
शासन आदेश पर आदेश देकर काम है करवाता,
शासन की हर योजना में, यही काम काम करवाता,
वह न पढा पाता, न बच्चों को आगे बढ़ा पाता।...



















