जिंदगी एक पहेली
जसवंत लाल खटीक
देवगढ़ (राजस्थान)
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कभी हंसाती है, कभी रुलाती है ..
कभी दगाबाज,
तो कभी बन जाती सहेली है ...!
सच तो यही है दोस्तों...!!
जिंदगी एक पहेली है ..! !
याद है मुझे वो बचपन के दिन...
जब बात-बात पर रो देते थे,
अब कंधो पर बोझ आ गया ...
अब तो सिर्फ दिल रोता है,
और आँखे अकेली है..!
सच तो यही है दोस्तों ..! !
जिंदगी एक पहेली है..!!
एक मौत के खातिर ..
जिंदगी का जहर पी रहे है,
सुख चेन से कोई नाता नहीं ...
लगता है ऐसे ही जी रहे है,
अरे! मेरे इन हाथो में तो...
बिना लकीरों की हथेली है..!
सच तो यही है दोस्तों...!!
जिंदगी एक पहेली है ...! !
ना जाने कितने मोड़ आते है ..
हर पल सबक सीखा जाते है,
चार दिन की जिंदगी यूँही निकल जाती है ..
और हम ढंग से जी भी नही पाते है,
आखिर में श्मशान ही हमारी हवेली है ..!
सच तो यही है दोस्तों..!!
जिंदगी एक पहेली है..!!
चंद कागज के टुकड़ो...




















