प्रेम का इजहार
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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पेड़ पर
मौसम आने पर
लगते फूल और फल
पेड़ प्रेम का प्रतीक
बन जाते
जब बांधी जाती
प्रेम के संकल्प की
धागे की गठान
पेड़ की टहनी पकड़े
करती प्रेम का इजहार
या पेड़ के तने से
सटकर खड़ी रहती
पेड़ एक दिन बीमारी से
सूख गया
प्यार भी कही खो गया
चाहत भी गम में
हुआ बीमार
एक दिन चला गया
मृत्यु की आगोश में
संयोग वो जब जला
दाहसंस्कार में
लकड़ियाँ उसी
पेड़ की थी
अधूरा इश्क
रहा जीवन मे
रूह तृप्त हुई
इश्क़ की
चाहत ने कभी
टहनियों को
छुआ तो था कभी।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "द...




















