हमें वो याद आते हैं
प्रशान्त मिश्र
मऊरानीपुर, झांसी (उत्तर प्रदेश)
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जरा सी बात से अक्सर,
हम इतना टूट जाते हैं।
वो हमको भूल बैठे हैं,
हमें वो याद आते हैं।
हमारी गिनती होती है,
शहर के गुनहगारों में,
गलतियां कोई करता है,
सजा बस हम ही पाते हैं।
वो अब तक मुझसे रूठा है,
कोई उसको मनाओ अब,
वहां वो रूठ जाते हैं,
यहां हम टूट जाते हैं।
ज़माने की हकीकत को
अभी तुम जानते हो क्या,
जिन्हें हम दिल से चाहेंगे,
वही अक्सर रुलाते हैं।
मेरे सारे गुनाहों की
सजा मुझको मुनासिब हो,
वो मेरी खातिर क्यूं तड़पे,
जिसे हम ही सताते हैं।
यहां हम छोटी बातों को
लगाकर दिल से बैठे हैं,
वो अक्सर दिल से रोते हैं,
मगर सबसे छुपाते हैं।
मैंने इन चंद छंदों में है
दिल का दर्द लिख डाला,
पढ़कर तुम भुला देना,
हम लिखकर भूल जाते हैं।
परिचय :- प्रशान्त मिश्र
निवासी : ग्राम पचवारा पोस्ट पलरा तहस...
























