दर्शन से धन्य हुये
संजय जैन
मुंबई (महाराष्ट्र)
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विधा : गीत भजन
तर्ज : तेरे इश्क का मुझे पर हुआ...
गुरु विद्यासागर के
दर्शन से हम।
मानों आज हमसब
हो गये धन्य।
गुरु विद्यासागर के
दर्शन से हम।
मानों आज हमसब
हो गये धन्य।
गुरु विद्या सागर के
दर्शन से हम।।
जिसे भी मिले दर्शन
विद्या गुरु के।
मानव जीवन उनका
सफल हो गया।
कलयुग में भी देखो
सतयुग जैसे मुनिवर।
चलते फिरते तीर्थंकर
कहते लोग उन्हें।।
गुरु विद्यासागर के
दर्शन से हम।
मानों आज हमसब
धन्य हो गये।।
चारों दिशाओं में
ऐसे मुनिवर।
बहुत कम हमें
देखने को मिले।
त्याग और तपस्या की
वो एक मिसाल है।
साक्षात जैसे वो
सबके भगवान है।।
गुरु विद्यासागर के
दर्शन से हम।
मानों आज हमसब
हो गये धन्य।।
मुझे जैसे ही मिला
गुरुवर का आशीर्वाद।
मानों आत्मा में मेरे
कमल खिल गया।
ना अपनी रही सुध तब
और न कुछ और दिखा।
बस...
























