मीरा तो थीं प्रेमदिवानी
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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कहता है इतिहास कहानी,
मीरा तो थीं प्रेमदिवानी।
कान्हा की थीं वे अनुरागी,
माना उनको ही नित स्वामी।
महलों का सुख रास न आया,
प्रेम डगर की थीं अनुगामी।
बहुत मनाया नित्य उन्हें पर,
राणा जी की एक न मानी।
कहता है इतिहास कहानी,
मीरा तो धीं प्रेम दिवानी।
राणा भेजे एक पिटारा,
मंशा थी मीरा डर जाएँ।
खोलें जब तत्काल उसे तो,
नाग डसे उनको, मर जाएँ।
नाग बना माला सुमनों की,
विस्मित थे राणा अभिमानी।
कहता है इतिहास कहानी,
मीरा तो थीं प्रेमदिवानी।
राणा ने फिर विष भिजवाया,
कह प्रसाद है यह मोहन का।
राणा थे भारी अचरज में,
पी मीरा ने शीश झुकाया।
श्याम भजन गाकर मंदिर में,
जोगन बन बैठी वह रानी।
कहता है इतिहास कहानी,
मीरा तो थी प्रेमदिवानी।
परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/...

























