आया बसंत बहार
शत्रुहन सिंह कंवर
चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
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आया बसंत बहार लेकर खुशियां अपार
चारों ओर महकें फूलों की बैछार
रंगो से सजे यह नवयौवन सा राग
कोयल कुहके मधुर तान
देखकर मन में उठे उमंग, उल्लास
रंगो में पिरोए है भाईचारा एकता का मिशाल
हरियाली छाई है नई विश्वास
चारों ओर महकें एक ताजगी का एहसास
देखकर मन भवर नाचने को है बेताब
ऐसा है मेरा ऋतुराज बसंत बहार।
परिचय :- शत्रुहन सिंह कंवर
निवासी : चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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