नारी जीवन
मनोरमा जोशी
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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नारी है नारायणी, नारी नर
की खान, नारी से ही उपजे
ध्रुव प्रहलाद समान।
नारी ने हर क्षेत्र में अपने ,
हौसलें की उडा़न भर
परचम लहराया कीर्तिमान
स्थापित किया है।
बंधनो के निबद्ध भावनाओं की
स्वतंत्र अभिव्यक्ति है नारी।
कटीली नागफनी राहों में
गुलाब है नारी।
सोच का आंकडा बनाना,
जटिलताएं, विवशताएँ,
समाज की समस्याएं,
रूढ़ीवादी परम्पराएं
सबको निभानें का
हौसला रखती है नारी।
झरने की तरह मानिन्द शांत
पीडा़ओं को सहती नारी।
रिश्तों की परिधि में घिरकर
सहती है नारी। दुर्गा, लक्ष्मी,
अहिल्या, मीरा, सीता, सावित्री
न जाने कितने रुप है नारी।
फिर भी नारी को वह
सम्मान नहीं मिला है।
आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है।
नारी सामाजिक दायित्व के
प्रति सजग, अधिकारों
के प्रति आवाज उठाने का
हौसला रखती है नारी।
पथ, प्रदर्शिका, स्वरक्षिका हर
श...






















