भारत की महिमा
धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू
बालोद (छत्तीसगढ़)
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गाओ माँ भारती की महिमा,
जीवन सुखमय आराम है....
वीर सपूतों ने दे दी बलिदानी,
मातृभूमि खातिर हो गए कुर्बानी।
उनके वीरता को करे सलाम हैं ...
जग में सोने की चिड़ियाँ कहलायें,
विश्व पटल पर जो परचम लहरायें।
यही भारत भूंईया के काम हैं...
अमर शहीदों को नमन करते हैं,
हर-पल, हर-क्षण वंदन करते हैं।
यही तो मातृभूमि की धाम हैं
तीन रंगों से निर्मित हैं तिरंगा,
आन-बान-शान इनके है अंगा।
माँ भारती की असली दाम हैं ...
अनेकता में एकता यही विशेषता हैं,
समन्वय भाव पुष्प यही विशालता हैं।
भारत की करते हम बखान हैं ...
भारत देश प्राणों से प्यारा हैं,
गंगा यमुना सरस्वती तीनों धारा हैं।
दृश्य अनुपम नयनाभिराम हैं ...
स्वदेश की रक्षा हिमालय करती है,
कन्याकुमारी चरणों को धोती हैं।
चारों दिशाओं में तीरथ धाम है...

























