कलम जब बोलती है
सुनील कुमार
बहराइच (उत्तर-प्रदेश)
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मन में बिखरे भावों को
शब्दों का रूप देती है
कह न पाते जो जुबां से
बात वो भी कह देती है
कलम जब बोलती है।
अंतर्मन में जो होता है
प्रकट उसे कर देती है
भावों को शब्द रूप दे
साहित्य सृजन करती है
कलम जब बोलती है।
भूत-वर्तमान-भविष्य के
सभी राज खोलती है
कलम जब बोलती है।
कभी-कभी प्रहार ये
तलवार से तेज करती है
कभी-कभी प्रहार
तलवार का रोक देती है
कलम जब बोलती है।
परिचय :- सुनील कुमार
निवासी : ग्राम फुटहा कुआं, बहराइच,उत्तर-प्रदेश
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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