नूर गुलाबी ओढ़कर
होशियार सिंह यादव
महेंद्रगढ़ हरियाणा
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नूर गुलाबी ओढ़कर, प्रभु करे निवास,
मनोकामना पूर्ण हो, आये सबको रास,
उसकी कृपा से ही, आये जन को सांस,
उसके ही आधीन, बनकर उनका दास।
नूर गुलाबी ओढ़कर, करता है इंसाफ,
दोषी को सजा मिले, निर्दोष हो माफ,
उसके ही प्रताप से, करते सभी जाप,
पापी कितने ही हो, कर देता है साफ।
नूर गुलाबी ओढ़कर, जन को देता बल,
गरीब इंसान सदा, बन जाता है सबल,
हर समस्या का वो, करता पल में हल,
हर जगह मिलता है, वायु हो या जल।
नूर गुलाबी ओढ़कर, दिखलाता है रूप,
इज्जत मान बढ़ जाये, बेशक हो कुरूप,
पूजा सभी हैं करते, लेकर हाथ में धूप,
उसके ही आधीन है, रंक हो या भूप।
नूर गुलाबी ओढ़कर, भर दे मन में जोश,
उसकी लाठी जब पड़े, खो देता है होश,
जिसने नाम ना जपा, उसे है अफसोस,
अंतिम सत्य रूप में, ले लेता आगोश।
नूर गुलाबी ओढ़कर, बूझा देता है प्य...

























