भारत के पूत
धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)
********************
बहुत सो चुका
मत लेटा रह
आँखे मूंदे
भीतर बाहर से
ललकार रहा शत्रु तुझे
मृत्यु खड़ी है द्वार पर।
मृत्यु का तांडव
होना जब निश्चित है
कायर बन मृत्यु का
वरण कर
माँ की कोख
क्यो करना चाहता है
कलंकित
चल शत्रु पर वार कर।
उठ खड़ा हो
ले शमशीर हाथों में
दे कर अपना लहू
कर रक्षा मातृभूमि की
गायेगी तेरी शौर्य
गाथाएँ
जनता हिन्दुस्थान की
लिख नया इतिहास अरिहंत
अरि का अंत कर।
लड़ ऐसा
जैसे लड़े थे
वीर गोविंद, शिवा और प्रताप
गीदड़ की मौत मरने से
अच्छा है,
लड़ मरे केसरी की भांति
रणभूमि पर।
तू अकेला नही
सम्पूर्ण राष्ट्र तेरे साथ है
याद कर अपने इतिहास को
इतिहास कायरों का नही
लिखा जाता है,
लिखा जाता है
विरो का, रणबांकुरों का
लाल बाल और पाल का
होती है माताएं धन्य
अपने लालो पर।
तू भूल रहा
लड़ी थी तेरी माँ तुझे
अपनी पीठ पर बांधे
झांसी में,
रोक न पाए थे, शत्रु के परकोटे
...





















