हिन्दी
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रचयिता : दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"
यदि हम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक रहना चाहते हैं, तो इसका माध्यम सिर्फ हिंदी ही हो सकता है।
हिंदी हिंद कंद छंद वृंद,
मंद द्वंद नंद
बस आनंद ही आनंद
सप्तसुरो के कलरव से
सरोबार हुई हिंदी
वीणा के तारों से
झंकृत हुई हिंदी
मानसपुत्रों के स्वरों से
अलंकृत हुई हिंदी
कश्मीर के किरीट से
कन्याकुमारी के तट तक
उपकृत हुई हिंदी।
लेखक परिचय :- नाम :- दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"
पिता :- श्री रामचन्द्र पोरवाल
माता :- श्रीमती कमला पोरवाल
निवासी :- जावरा म.प्र.
जन्म एवं जन्म स्थान :- ०१.०३.१९६२ जावरा
शिक्षा :- एम कॉम
व्यवसाय :- भारत संचार निगम लिमिटेड
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