भेड़िये
राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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हवसी भेड़िये
कहीं बाहर नहीं
हमारे अंदर
हमारे आस पास
ही रहते है।
कभी हमारे
गंदे विचारों में,
कभी हमारी
गंदी निगाहों में।
कभी हमारी
गंदी सोच में
ताकते रहता है वो
ओरों की बहू
बेटियों को।
कभी-कभी
अपनी सोच से
लाचार होकर ये भेड़िये
नोचते है अपनी ही
बहू बेटियों को भी।
परिचय :- राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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