जीवन का सच
कु. आरती सिरसाट
बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)
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इश्क़ की राह में हर
एक इंसान बदनाम हैं...!
कुछ खत लिखें तो
कुछ अभी भी बेनाम हैं..!!
खुशियों को तलाश रही,
जिन्दगी गमों की बहार हैं...!
हारना और जीतना यहीं
तो जीवन का सार हैं..!!
जिम्मेदारियों ने उस नन्ही सी
मासूमियत को घेरा है...!
एक गलती से टूट गया वो संबंध,
उसनें कहा ये तेरा है ये मेरा हैं..!
किसी की यादों में ये
आँखें भी बरसती हैं...!
प्यास लगने पर ये धरती भी
बारिश के लिए तरसती हैं..!!
दुनिया कहें समय को
यहीं सबसे बड़ा काल हैं...!
कहती है कुछ रातें अंधेरों से, इंसान
ही इंसान के लिए बना रहा जाल हैं..!!
परिचय :- कु. आरती सुधाकर सिरसाट
निवासी : ग्राम गुलई, बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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