ये देखो कैसा आया जमाना है।
विरेन्द्र कुमार यादव
गौरा बस्ती (उत्तर-प्रदेश)
********************
घराती को पानी खरीद कर लाना है,
ये देखो कैसा अब आया जमाना है।
बारात में यदि खाना हमें खाना है,
तो खाना खड़े होकर ही खाना है।
रसोई में खाना खड़े-खड़े बनाना है,
ये कैसा देखो अब आया जमाना है।
खुद थाली व खाना लेकर आना है,
खड़े-खड़े सबको खाने को खाना है।
ये देखो कैसा अब आया जमाना है,
प्लेट कूड़ेदान के ठिकाने लगाना है।
पानी स्वयं निकाल कर ही पीना है,
चाहे शादी का कोई भी महीना है।
खड़े खाना व खड़े ही पानी पीना है,
भला व्यक्ति का जीना कोई जीना है।
अब बारात नौटंकी नाच के बिना है,
बारात में अब केवल नाच नगीना है।
ये देखो कैसा अब आया जमाना है,
खड़े-खड़े ही सबको खाना खाना है।
परिचय :- विरेन्द्र कुमार यादव
निवासी : गौरा बस्ती (उत्तर-प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक ह...

























