बसंत
रेखा कापसे "होशंगाबादी"
होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)
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सुमन सुवास सुरभित उपवन,
मन को अतिशय भाया है।
तन हर्षित है, मन हर्षित,
मौसम बासंती आया है।।
माँ भगवती को करूँ नमन,
रोली कुमकुम और चंदन।
धूप दीप अक्षत अर्पण,
हाथ जोड़ करूँ मैं वंदन।।
विद्या वाणी सुरों का दान,
वरद मुझे दो बनूँ गुणवान।
वास करो माँ कंठ मे मेरे,
बनूँ मैं जग में सदा महान।।
भक्तिमय सकल संसार,
बुद्धि भंडार समाया है।
तन हर्षित और मन हर्षित,
मौसम बासंती आया है।।
लहराती गेहूँ की बाली,
फूली सरसो पीली वाली।
बौर सजे है अमुआ डाली,
कोयल कूके है मतवाली।।
धरा कर रही है श्रृंगार,
बहे बाग में शीत बयार।
शीत ऋतु की करे विदाई,
दिनकर ने थामी तलवार।।
पीली धरणी पीला अंबर,
पीत वर्ण ही भाया है।
तन हर्षित और मन हर्षित,
मौसम बासंती आया है।।
रसमय फूलों के मकरंद,
तितली भरती अपने रंग।
प्रेम प्रीत बरसाती अपना,
ले जाती हैं अपने सं...



















