काम नही–वेतन नही
प्रीति शर्मा "असीम"
सोलन हिमाचल प्रदेश
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काम है.... तो वेतन है।
अक्सर यही कहा जाता है।
ईश्वर तो अपने काम का,
कोई भी वेतन नही पाता है।
बस सब बनाये जाता है।
काम है... तो वेतन है।
बस इंसानी कामों को,
वेतन दिया जाता है।
काम करा कर,
धनाढ्य सेठों द्वारा,
वेतनभोगी का,
आधा हिस्सा मार लिया जाता है।
वो जीवन की जरूरतें भी,
बड़ी मुश्किल से जुटा पाता है।
साहूकार बनता जाता है,
दूसरे के मारें वेतन से,
तनता जाता है।
फिर अपने नीचें,
काम करने वालों पर,
अपशब्दों से चढ़ता जाता है।
वेतन पाने वाला,
मंहगाई से दबता जाता है।
परिचय :- प्रीति शर्मा "असीम"
निवासी - सोलन हिमाचल प्रदेश
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