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डॉ. किरन अवस्थी
मिनियापोलिसम (अमेरिका)
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नो दाग, नो धब्बे के,
चाहे कितने ऐड बना लो
कन्या-जीवन पर लगे दाग को,
हरगिज़ नहीं मिटा सकते।
चाहे कितने ए.सी.,
कूलर और बना लो
जब तक नन्हीं
कलियों की दुर्गति होगी
बाला की अंतर्ज्वाला को,
हरगिज़ शांत नहीं कर सकते।
चाहे कितनी सीमेंट बना लो,
मन के टूटे तारों में
भग्न संवेदना की धारों में,
न तुम जोड़ लगा सकते।
चाहे भौतिकता की
कितनी डोर बढ़ा लो
नैतिकता का पुष्प सुखाकर,
आध्यात्म का बीज मिटाकर
मन का उद्वेलन, हरगिज़
खामोश नहीं कर सकते।
भारत की पावन संस्कृति,
नन्हीं आहों से तपती है
कितने ही फुव्वारे लगवा लो,
बच्ची के तप्त ह्रदय को
मन के तपते अंगारों को,
हरगिज़ शांत नहीं कर सकते।
परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी
सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर
निवासी : सिलिकॉन सिटी इंदौर (मध्य प्रदेश)
वर्तमान निवासी : मिनियापो...






















