समय का पहरा
डाॅ. मिनाक्षी अनुराग डालके
मनावर जिला धार (मध्य प्रदेश)
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माटी के पुतले पर
समय का पहरा है
ना तेरा है ना मेरा है
यह मन के भावो
से भी गहरा है
मानो यह घावों पर
लगे मरहम की तरह है
ये समय का पहरा है
सूरज की किरणों पर
ग्रहण सा ठहरा है
चांद की शीतलता पर
भी कभी कहरा है
यह समुद्र की लहरों
की तरह झकोरा है
यह हर पल बढ़ता
वृक्षों का सहरा है
ये समय का पहरा है
मन की आकांक्षाओं में,
पीड़ाओं मे,
प्रतिक्षण जिसका बसेरा है
यह ना कल था तेरा
ना आज मेरा है
फिर भी हर भोर
नया सवेरा है
ये समय का पहरा है
परिचय : डाॅ. मिनाक्षी अनुराग डालके
निवासी : मनावर जिला धार मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।
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