आशावादी गीत
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर म.प्र.
********************
हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई,
बांधे सबको स्नेहिल डोरी।
साथ मनाते मिलजुल कर सब,
ईद-दिवाली, क्रिसमस-होरी।
अभी आस्था का सागर है,
अभी भरोसा मरा नहीं है।
सकल विश्व में कोरोना है,
फिर भी मानव डरा नहीं है।
गीत अभी हैं आशावादी,
गेय अभी है घर-घर लोरी।
साथ मनाते मिलजुल कर सब,
ईद-दिवाली, क्रिसमस-होरी।
नित्य बांसुरी की तानों से,
जंगल में मंगल होता है।
चंदन चाचा के बाड़े में,
मल्लों का दंगल होता है।
जीवन सिर पर ले जाती है,
गाँवों में पनघट से गोरी।
साथ मनाते मिलजुल कर सब,
ईद-दिवाली, क्रिसमस-होरी।
राखी लेकर कमली काकी,
चाँदू चाचा के घर आती।
सलमा आपा दीवाली पर,
दीपू से सौग़ातें पाती।
पीपल नीचे चर्चा करते,
हर दिन हस्सू एवम् होरी।
साध मनाते मिलजुल कर सब,
ईद-दिवाली, क्रिसमस-होरी।
संचालित हैं पुण्य कर्म कुछ,
चलते हैं सहयोग निरन्तर।
जीवित हैं कुछ परम्परा...










