महागौरी वन्दन
आचार्य नित्यानन्द वाजपेयी “उपमन्यु”
फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश)
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महामाता महागौरी जगत कल्याणकारी हैं।
तुम्हारी आस हमनें नाव दरिया में उतारी है।।
शिवानी शैलजा अम्बा त्र्यम्बक तोषिणी गौरी।
चतुर्भुज रूप है अनुपम, धरे हैं चंद्रमा मौरी।।
लिए त्रयशूल दाएँ कर, बजातीं वामकर डमरू।
वृषभ आरूढ़ हैं माता, चलें हैं संग में भैरू।।
जिन्होनें भक्त के कल्याण हित लीला प्रसारी है।।१!
सुता हिमवान की हो तुम, चुना पति शंभु शंकर को।
कठिन तप से पड़ी काली, रिझाया तब शुभंकर को।।
पिया सितकंठ आये तब, दिया वर गौर वर्णा हो।
बनी शंकर प्रिया शुभ्रा, शिवानी हो अपर्णा हो।।
तभी से गौरवर्णा हो, वदन कर्पूर क्यारी है।!२!
तुम्हीं दुर्गा तुम्हीं काली, तुम्हीं तो अन्नपूर्णा हो।
तुम्हीं शाकाम्भरी देवी, महिष की दम्भ चूर्णा हो।।
सुनैना दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गतारिणि हो।
भवानी दुर्गभा अम्बा, श...





















