गणपति स्तुति – कुण्डलिनी छंद
कन्हैया साहू 'अमित'
भाटापारा (छत्तीसगढ़)
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अधिनायक अधिपति 'अमित',
अभिनंदित अधिलोक।
शुभदाता करिये शमन,
शरणागत का शोक।।
शरणागत का शोक,
विश्वमुख वरदविनायक।
प्रथम नमन अवनीश,
अष्टमंगल अधिनायक।।
गुणवंता गुणनिधि गुणिन,
गौरीसुत गणराज।
सुखदायक शंकरसुवन,
सिद्ध कीजिए काज।।
सिद्ध कीजिए काज,
जयति जय जगत नियंता।
'अमित' अथक अनुनीत,
गुणाकर हे गुणवंता।।
मोदक, मेवा, मधु सहित,
मनोभाव मनुहार।
मैं मूरख मतिमंद मति,
अर्चन हो स्वीकार।।
अर्चन हो स्वीकार,
मिले मुझको चरणोदक।
'अमित' अकिंचन भेंट,
भावमय मेवा मोदक।।
सदा सहायक भक्त के,
स्वामी सिद्ध समर्थ।
विघ्न विनाशक विघ्नहर,
कर सुविमल अव्यर्थ।।
कर सुविमल अव्यर्थ,
आप ही हो अवधायक।
'अमित' विनय स्वीकार,
रहो अब सदा सहायक।।
परिचय : कन्हैया साहू 'अमित' (शिक्षक)
निवासी : भाटापारा (छत्तीसगढ़)
घोषणा : मैं यह शपथ पू...



















