
दीवान सिंह भुगवाड़े
बड़वानी (मध्यप्रदेश)
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कोख में लेकर यत्न किया, तुझे जन्म दिया
नींद देकर तुझे, खुद न कभी चैन लिया
एक आह सुन तेरी, कई रातें जिसने न सोया
उस माँ की ममता को याद रखना बिटिया।
भूखा रह खुद, जिसने निवाला दिया
तुझे पालने हेतु खेतों में दिन-रात काम किया
कर्ज लेकर भी मुरादें तेरी, जिसने पूरी किया
उस पिता का समर्पण याद रखना बिटिया।
अपनी खुशियां त्याग, सपनों का बलिदान दिया
पढ़ाने के लिए तुझे, खुद पढ़ना छोड़ दिया
तेरी फीस जमा करने हेतु जिसने मजदूरी किया
उस भाई का बलिदान याद रखना बिटिया।
लक्ष्य मिले तुझे अपना, हर संभव प्रयास किया
मंजिल अपनी पा ले तू, वह धैर्य-साहस दिया
विपदाएं तेरी सारी, जिसने खुद झेल लिया
उस बहन की उम्मीदें, ध्यान रखना बिटिया।
खुद्दारी से अपनी, समाज में थोड़ा सम्मान पाया
गरीबी में गुजार दी जिंदगी, कभी दगा न किया
मेहनत कर ही कमाया और सभी को खिलाया
उस परिवार की इज्जत, जरा देखना बिटिया।
पढ़ाकर तुझे, तुझपर सभी ने नाज किया
अंधियारा दूर करेगी तू, यह आस किया
गलतियों पर भी तेरी, कभी न अट्टहास किया
उस समाज का थोड़ा मान रखना बिटिया।
बिन तेरे कैसे जीयेंगे, जिसने तुझे जीवन दिया
आंसू खून के रोयेंगे वो, जिसने हंसी दिया
क्या गुजरेगी उनपे, तेरे जाने के बाद संग पिया
उन अपनों का जरा गौर करना बिटिया।
दिल में गैर सही, अपनों भी याद रखना बिटिया
तू जहां भी रहे, खुश रहे, हमने दुआ यही किया
अन्न खिलाया जिसने, जिसने अपना दूध पिलाया
बस दुआओं में उन्हें याद रखना बिटिया।
परिचय :- दीवान सिंह भुगवाड़े
निवासी : बड़वानी (म.प्र.)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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