यादें
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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साल जा रहा देकर हमको न, याद में ठहरे लोग।
भोले-भाले, साथ निभाते, भले-बुरे सब लोग।।
स्मृतियाँ कुछ मीठी होतीं, तो कुछ कड़वी होतीं,
समय बीतता, पर यादें में, अज़ब-निराले लोग।
अरमानों में रंग भरे हैं, तो कुछ अति फीके,
हाथ मिलाते, नेह निभाते, प्रीति जताते लोग।
कर्म-भाग्य ने मिलकर के ही, परिणामों को सौंपा,
मित्र बन गये अनजाने में, आगे बढ़कर लोग।
भूल सकूँगा नहीं किसी को, जिन्हें विगत ने पाया,
सदा ही ठहरे रहेंगे यूँ ही, सदा सुहाते लोग।
जीवन की गाड़ी चलती है, मिलते लोग-बिछुड़ते,
यादों में सब रहें सुरक्षित, प्रेम बहाते लोग।
लौट नहीं आता है बीता, बीती बातें शेष,
दूर हो गये,या बिछुड़े वे, याद समाते लोग।
जीवन की रफ़्तार तेज है, भाग रहा है रोज़,
अच्छी स्मृतियाँ का है वंदन, जिनमें ठहरे लोग।।
परिचय :- प्रो. ...

