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Tag: सत्येन्द्र कुमार सिंह ‘सहज’

स्वदेश प्यार
कविता

स्वदेश प्यार

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** कहां है स्वदेश प्यार? कहां है मानव प्यार? कहां हैं अमर क्रांतिकारी? कहां है मानव सेवा की क्यारी? कहां की धरती जग में न्यारी? कहां की धरती जग में प्यारी? कहां हैं पावन सीता सी नारी? कहां है धर्म ज्ञान की पिटारी? कहां है वीरों की फुलवारी? कहां वेद की ऋचाएं नित गूंजती हैं? कहां दुनिया पेड़ पौधों को पूजती है? कहां गो पालन एक बड़ा व्रत है? कहां हो रहा विकास अनवरत है? कहां हैं शिवा, प्रताप और छत्रसाल? किसका हृदय है समंदर सा विशाल? किसके हृदय में आता विश्व प्रेम का उछाल? कहां हैं हमारे धर्म पाल? कहां है उन्नत भाल? कहां है बल अपरंपार? कहां गूंजता सदा मंत्रोच्चार? कहां गूंजता शक्ति का जय-जयकार? कहां अटल संकल्प संबल है? कहां वेद, पुराण का बल है? कहां गूंजते गीता के अमर स...
है विश्व हमारा परिवार
कविता

है विश्व हमारा परिवार

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** हैं हम हिम्मती हिंदुस्तान वाले हैं हम गीता,वेद,पुराण वाले जो हम ठानते है जो हम मानते हैं वह कर डालते हैं तीन समंदर रख कर साथ में तिरंगा रख कर हाथ में चलते हैं हम ऐसे ही नहीं उबलते हैं हम ऐसे ही नहीं उछलते हैं हम है हृदय हमारा विशाल है हिंद हमारा विशाल देख अन्याय आता रक्त में उबाल है सारा संसार हमारा परिवार हैं हमारे उच्च संस्कार होते हैं हमारे हिंद में ईश्वर के अवतार करते हैं हम सब पर उपकार मानता है हमें सारा संसार है हमें सच्चाई से सदा प्यार बदल देंगे हम सारा संसार करके सत्कर्म बार बार। परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी ...
क्या डर …?
कविता

क्या डर …?

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** बरसात का मुझे क्या डर? जब नहीं है मेरा अपना घर जब हूं मैं सड़क पर जब हूं मैं फुटपाथ पर तो मुझे क्या डर है लुट जाने का? जब नहीं है छत मेरे ऊपर तो छत टूट जाने का क्या डर? कैसा डर? क्यों डर? परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को खोलकर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद...
है हिंदी हमारी पहचान
कविता

है हिंदी हमारी पहचान

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** है हिंदी हमारी शान है हिंदी हमारी पहचान हैं हिंदी में, दिनकर, मैथिली शरण और रसखान है हिंदी के पट्ट पर, पंत, प्रसाद, निराला का निशान है हिंदी के पट्ट पर, कबीर, तुलसी, महादेवी का निशान है हिंदी में सुभद्रा कुमारी चौहान हैं हिंदी में 'सहज' के मधुमय गान हिंदी से करेंगे हम नव निर्माण है हिंदी से हिंदुस्तान का सम्मान है हिंदी जन जन की भाषा है हिंदी हमारे मन की भाषा है हिंदी हमारे नील गगन की भाषा हैं हमारी सारी भाषाएं पल्लवित पुष्प, हजारों पुष्पों से बनी यह माला है है हिंदी हमारे भारत मां का मुकुट हिंदी ने हम सबको संभाला है है हिंदी हमारी विशाल समंदर समाती सारी नदियां इसके अंदर बोलूंगा हिंदी, लिखूंगा हिंदी सीखूंगा हिंदी,सिखाऊंगा हिंदी है हिंदी हमारे अंदर है हिंदी हमारी अवनी और अंबर।...
हम हिंदुस्तान के वीर
कविता

हम हिंदुस्तान के वीर

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** चाहे फांसी पर लटका दो चाहे बिजली का झटका दो चाहे चौराहे पर लटका दो हम देश हित शीष कटाने वाले हम देश हित शीष चढ़ाने वाले हम वीर, पर्वतों से टकराने वाले हम वीर, गंगा के मैदान वाले हम वीर, हिंदुस्तान वाले हम वीर, नहीं डरने वाले हम वीर, भारत के लिए मरने वाले हम वीर, मर कर अमर रहने वाले हमारे नस-नस में बहता स्वाभिमान है हमारे रोम-रोम में बसता हिंदुस्तान है हमारे रोम-रोम में बसता आन बान है हमारे रोम-रोम में बसता हिंदुस्तानी शान है क्रांतिकारी हम, शांति के पुजारी हम जीत कर रहेंगे हम, है हममें इतना दम एक हाथ में तलवार, एक हाथ में संविधान है हमारे हृदय में बसता गीता, पुराण, कुरान है स्वदेश हित दे देते हम बड़े बलिदान हैं परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निव...
नव निर्माण
कविता

नव निर्माण

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** ये मजबूत मेरी भुजाएं जैसे पर्वत की शिलाएं यह चौड़ी मेरी छाती है जो भारत मां की थाती यह मेरा दमकता उन्नत भाल युद्ध भूमि में करता कमाल मैं बागी बलिया से मैं त्यागी बलिया से मैं बागी बैरिया से मैं हूं हिंद का जवान मैं चाहता हूं करना कुछ महान जिससे विकसित हो हिंदुस्तान करके नव निर्माण चला के कर्म का वाण बना दूं शक्ति शाली हिंदुस्तान उतार लाऊं आसमान बनाऊं धरा को स्वर्ग समान। परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏...
हम बागी बलिया वाले
कविता

हम बागी बलिया वाले

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** हम बागी बलिया वाले हम बागी बैरिया वाले हम गंगा के किनारे वाले हम घाघरा के किनारे वाले हम हिम्मत वाले हम कीमत वाले हमारे नस नस बहता स्वाभिमान है हम बागी बलिया वाले देते बलिदान हैं डर का कहीं नहीं नामोनिशान है स्वर्ग से ऊंचा हमारा स्वाभिमान है। परिचय :- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया (उत्तरप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हम...