हिन्दी हिंदुस्तान की
आनंद कुमार पांडेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना
हिन्दी हिंदुस्तान की मोहताज नहीं पहचान की।
विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।।
अमर असंख्यक कवियों को पहचान मिला,
कविताओं का अद्भुत एक उद्यान मिला।
सभी बोलियाँ इसमें घुल-मिल जाती हैं,
तभी मातृ भाषा का भी सम्मान मिला।।
हिन्दी हीं है नीव मेरे इस मुस्कान की।
विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।।
हिन्दी की यह सृजन शीलता,
नित नव पाठ पढ़ाती है।
प्रेम भाव की निर्मल धारा,
जन-जन तक पहुँचाती है।।
कलम हुई आभारी इस एहसान की।
विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।।
हिन्दी हिंद की बागडोर है,
सत्य सनातन की पहचान।
भाषाओं का अमृत संगम,
हम सबकी आन-बान और शान।।
यही किरण आनंद के हर विहान की।
विश्व भी लोहा माना है मेरे इस ...


